Thursday, 12 July 2012

कौन !

कोई जीता है यहाँ जीने के लिए,
कोई फकत जीने के लिए जीता है,
हार - जीत का होता है  फैसला उस दिन,
जब हार मिलते हैं हार जीतने के बाद !

हर कोई खिलाड़ी है खेलता है बाज़ी यहाँ,
बस यहाँ इंसान ही कम मिलता है,
दुनिया है यारों यह मत भूलो ,
यहाँ सट्टे का बाज़ार गरम रहता है !

तुम यहाँ जियो तो जियो कैसे,
हर तरफ जाल बिछा रहता है,
कभी तुम मछली मगर की ,
तो कभी मगर भंवर में फंसा मिलता है !

चलो काट दें आज जाल के फंद सभी ,
ये मुस्कान जो सय्याद ओढ़े रहता है,
इन अदाओं के ही तो मारे हैं हम सभी,
अपने कातिल को हमराज़ समझ बैठे हैं !


  ..... मुक्ता शर्मा