Friday, 2 September 2011

कब मिलोगी ?

पूछा ज़िन्दगी ने ,'ख़ुशी' से,
कहो, कैसे आना हुआ ?
आज कहीं और, दिल लगा नहीं ,                             
या, इत्तेफाकन  गुज़रना हुआ ?

अधीर प्रेमी सा, पूछा फिर से,
कभी - कभी मिलोगी ?
या अक्सर  मिलती रहोगी ?
या देश के नेता की तरह ,
चुनाव होते ही , रस्ता  भूलोगी ?

बड़ी शर्मिंदा हुई, कहा, गलती हुई ,
अबकी  बार  न  जाऊँगी ,
नेता  जी  चाहे  आयें  न आयें ,
मैं  भ्रष्टाचार की तरह, 
अपनी धूनी यहीं  जमाऊँगी !

उसी  दिन से दोस्तों -

भ्रष्टाचार ख़ुशी संग रहने लगा ,
आम आदमी फिर से ,
दुःख  के 'भवसागर' में उतर गया,
संवेदनहीन  सरकार से लड़ने , 
जीवन  के अन्न शन पर बैठ गया  !






1 comment:

  1. BE A1 OM ( . ) Achcha , tho huM , Milte Hain , ab mile ya parson , suhaane din ko , waheen , jahan Sabhi , aate jaate rahe ! _/*\_ ALLAH AMEN Z0

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