पूछा ज़िन्दगी ने ,'ख़ुशी' से,
कहो, कैसे आना हुआ ?
आज कहीं और, दिल लगा नहीं ,
या, इत्तेफाकन गुज़रना हुआ ?
अधीर प्रेमी सा, पूछा फिर से,
कभी - कभी मिलोगी ?
या अक्सर मिलती रहोगी ?
या देश के नेता की तरह ,
चुनाव होते ही , रस्ता भूलोगी ?
बड़ी शर्मिंदा हुई, कहा, गलती हुई ,
अबकी बार न जाऊँगी ,
नेता जी चाहे आयें न आयें ,
मैं भ्रष्टाचार की तरह,
अपनी धूनी यहीं जमाऊँगी !
उसी दिन से दोस्तों -
भ्रष्टाचार ख़ुशी संग रहने लगा ,
आम आदमी फिर से ,
दुःख के 'भवसागर' में उतर गया,
संवेदनहीन सरकार से लड़ने ,
जीवन के अन्न शन पर बैठ गया !
BE A1 OM ( . ) Achcha , tho huM , Milte Hain , ab mile ya parson , suhaane din ko , waheen , jahan Sabhi , aate jaate rahe ! _/*\_ ALLAH AMEN Z0
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