चार कोस चल कर जीवन के,
चार कोस चल कर जीवन के,
जो होता केवल चलते जाना,
जीने का केवल मूल अर्थ,
चार कोस चल कर जीवन के,
पाकर सन्देश एक बीज से पनपा,
वृक्ष कैसा ये सुंदर जीवन का,
निरंतर बहे यह स्रोत प्रेम का,
ऐसा मन्त्र कानों में कहते जाना !
चार कोस चल कर जीवन के,
जाने क्यूँकर थम गया सफ़र !
अभी अभी तो ज़ाहिर हुए हैं ,
जीवन के खट्टे मीठे अनुभव !
चार कोस चल कर जीवन के,
चार कोस चल कर जीवन के,
जाने क्यूँकर थम गया सफ़र !
कभी चांदनी, कभी धूप में,
निखरा संवरा है मेरा रूप प्रखर ,
मरुस्थल में पनपे हैं चटकीले,
फूल कैक्टस के इधर उधर !
जाने क्यूँकर थम गया सफ़र !
जो होता केवल चलते जाना,
जीने का केवल मूल अर्थ,
समय, स्वयं में जीवन होता ,
रचती प्राणी क्यूँ कुदरत इतने ,यत्न कर !चार कोस चल कर जीवन के,
जाने क्यूँकर थम गया सफ़र !
पाकर सन्देश एक बीज से पनपा,
वृक्ष कैसा ये सुंदर जीवन का,
निरंतर बहे यह स्रोत प्रेम का,
ऐसा मन्त्र कानों में कहते जाना !
चार कोस चल कर जीवन के,
जाने क्यूँकर थम गया सफ़र !
BE A1 OM ( . ) Jo raah chuni tune , usi raah pe raahi chalte jaana re , ho kitni bhi lambi raah , are ho , ho kitni bhi lambi raah , diya ban jalte jaana re , usi raah pe raahi chalte jaana re ! _/*\_ ALLAH AMEN Z0
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